अवसरवादी तंत्र
जिन चंद अपनों के लिए हम दुनिया से भिड़ जाते है क्या वे वाक़ई में हमारी दुनिया का हिस्सा है या फिर जिन्दगी की कहानी का बस एक छोटा सा किस्सा है ?
सवाल बेहद गंभीर है in fact घर-घर की सच्चाई है । सच कहूँ तो सदियों से चली आ रही उस पंरपरा का पालन अब बेमन से परंतु पूरी निष्ठा और लगन से करते है क्योंकि हम संस्कारी लोग है जिन्हें ये सभ्यता माँ-बाँप से विरासत में मिली है
और शायद हमारी generation इस
आदर-सत्कार की responsibility को ताउम्र निभाने के लिए वचनबद्ध है । पर क्या ये अवसरवादी लोग हमारे सेवा और सम्मान की कद्र करते है ।
अरे हमें इनसे धन-दौलत मान-सम्मान नहीं चाहिए बस जरूरत के वक़्त कम से कम हमारे आस-पास रहे भले हमसे हमारा हाल-चाल भी ना पूछे मगर हालात की गंभीरता को समझे और समाज को दिखाने के लिए ही सही एक छत के नीचे इन चारदीवारों के बीच पड़े किसी सामान की तरह भी परिवार का अंग बनकर संग रहे , ये भी बहुत है । मगर अफ़सोस कि इनसे इतना भी नहीं होता । वैसे तो इन अवसरवादियों के पास भरपूर समय होता है पर जब हमें थोड़ी सी उम्मीद होती है तब इन्हें दशरथ माँझी की तरह पहाड़ तोड़कर सड़क बनानी होती है ।
जब विचार इतने संकीर्ण हो तो फिर परिवार छोटा क्यों ना हो !
Quantity doesn't matter to a family but Quality matters ...
@shabdon_ke_ashish ✍️
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