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Showing posts from December, 2025

एक स्त्री 🌱

क्या तुम्हारी तबीयत से वो अपनी तबीयत भी जोड़ देगा क्या ? जिस आदमी के लिए तू औरत बनी है लड़की से वो आदमी अपनी आदमियत छोड़ देगा क्या ? कभी पूछ अपने दिल से ज़रा ऐ दरिया जिस ओर मुड़ी है तू शौक से क्या उस ओर वो भी समंदर को मोड़ देगा क्या ? ये किस भ्रम में है तू सात जन्मों के क्या इस जन्म में ही वो रिश्ता तोड़ देगा क्या ? जिस ओर पलकें बिछाए बैठी है तू ओ स्त्री क्या वो भी अपनी नजर उस ओर देगा क्या ? जिस सम्मान का अभिमान पाल रखा है मन में तूने क्या तेरे मान की लाज वो थोड़ा और देगा क्या ? जिन लम्हों के दामन में जीना है तुझे क्या वो हसीं दौर देगा क्या ? जिस खामोशी से सबकुछ सहा है तुमने क्या वो दबा हुआ सा ही सही तनिक शोर देगा क्या ? जिन रिवाजों और तानों ने रुलाया है तुझे क्या वो उनका गला मरोड़ देगा क्या ? जिसके लिए तू आ गई है सब छोड़ के क्या तेरे लिए भी वो सबको छोड़ देगा क्या ? क्या तुम्हारी तबीयत से वो अपनी तबीयत भी जोड़ देगा क्या ? जिस आदमी के लिए तू औरत बनी है लड़की से वो आदमी अपनी आदमियत छोड़ देगा क्या ?                     -  एक स्त्री ✍️ @shabdon_ke_ashish ✍️

आप भी एक गांधी है

अगर आपके भीतर भी विचारों की आंधी है  तो समझिए कि आप भी एक गांधी है  जिसे भय नहीं हथियारों का  जो शक्तिपुंज है विचारों का  जो सबको साथ लेकर चल सके  जो अकेले भी भीड़ की तरह निकल सके  जिसके पास सत्याग्रह की शक्ति हो  जिसकी वाणी में भक्ति हो  जो अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हो  सत्य और अहिंसा ही जिसका रक्त हो  जो नदी की तरह अपना रास्ता खुद बनाता हो  भटके हुए को सन्मार्ग पर लाता हो  जो धर्म की राजनीति नहीं राजनीति का धर्म जानता हो  जो अल्लाह और ईश्वर को एक मानता हो  जिसकी जुबान में स्वतंत्रता और सीने में आजादी है  अगर आपके भीतर भी विचारों की आंधी है  तो समझिए आप भी एक गांधी है  - आशीष ✍️