जिन्दगी

जिन्दगी !
तेरी यादों की लुका छिपी
 का हिस्सा हूँ
माना मैं तेरा 
गुजरा हुआ किस्सा हूँ
पर तू भी
कुछ नहीं
बिन मेरे
सच मैं भी
कुछ नहीं
तेरे बिन
चल अब गिन
गर है मुमकिन
पल पल
हर पल 
ये पल 
वो पल
ना तू रुकी 
ना मैं रुका
ना तू झुकी
ना मैं झुका
बेशक
बेझिझक
चल तू
मैं भी तो हूँ
तेरे साथ साथ
तू डाल-डाल
मैं पात-पात
इस रात 
उस रात
तेरे मेरे 
बिखरे जज्बात
पर मत बन 
अंजान
तू भी सुन ले
और मान
जब तक है 
ये जान
तुझसे हीं है जंग
हूँ मैं माना तंग
पर तू क्यों है दंग
तू तो मस्त-मलंग
तुझे डर है कि एक दिन
तू मुझसे हार जाएगी
पर उससे पहले 
तू मुझे मार जाएगी
 मर के भी जब
मेरा नाम रह जाएगा
तू सोच की तब
तेरा वार कहाँ जाएगा
तू मुझसे है 
मैं तुझसे नहीं
अरे सुन तो सही
जो मैंने कही
अब से रटना 
तू - 24×7
कि तेरा 
Boss है AK47

24×7...

कि तेरा
Boss है AK47

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