उनके बारे में लिखते-लिखते

एक अरसा बीत गया है 
अब तो बेसब्री ने भी रफ्ता-रफ्ता
सब्र का दामन थाम लिया है 
पहले इजहार में लिखा
फिर इंतजार में लिखा
अब लिखते है हाल-ए-दिल में
उस आशिकी को 
जो ना कभी हुई ना कभी दिखी 
बस कभी कभार एक ज्वार सा
आता है धड़कनों के बीच 
और फिर यादों की कुछ लहरें
टकराकर लौट जाती है वापस 
आहिस्ते - आहिस्ते ......
उनके बारे में लिखते-लिखते !!!!

✍️ shabdon_ke_ashish ✍️

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