इश्क की गलियाँ *****

नायाब ना रही अब
बेवफाई से तन्हाई तक

सफर कर गए सभी ...
शायद ; जो कभी !!

यहाँ " जश्न-ए-इश्क "
के ' दिवान-ए-खास ' थे .....

✍️ shabdon_ke_ashish ✍️

Comments

Popular posts from this blog

वक़्त बदलता नहीं , वक़्त को बदलना पड़ता है ।

MAINSTREAM :- A strong walk to BIPARD

सपना वो नहीं जो आप नींद में देखते है बल्कि सपना वो है जो आपको सोने ना दे