तुम रुक जाते हो ना हर बार कुछ नया , कुछ बड़ा करने से पहले आज भी । दरअसल ये रुकने की आदत तुम्हारी कमजोरी नहीं है ये तो वो ताकत है जिसे तुम्हारे अंदर पिरोया गया है बचपन से - हार जाने का डर । मगर अपने भीतर के भय को तो तुमने कई दफा हराया है ,इसी उठा पटक ने तो तुम्हे जीना सिखाया है । तो फिर विचलित है क्यों तुम्हारे मन का अर्जुन एक बार फिर जीवन के महाभारत से ,सफलता तो संघर्ष से ही मिलती है ये परम् सत्य है । अंतर बस इतना है कि इस युद्ध में पार्थ भी तुम हो और रघुनाथ भी तुम ही । तो फिर अविलंब आरंभ करो बिना किसी संदेह के लक्ष्य तुम्हारा सामने है । Shabdon_ke_Ashish ✍️
ना पतंग है ना डोर है ना लाई-तिलवे का शोर है ये साँझ है या भोर है वो उत्साह अब किस ओर है क्या ठंड ही बेजोड़ है या फिर मन में ना अब जोर है हर तरफ पसरी शांति है ये कैसी मकरसंक्रांति है हृदय में बसी एक भ्रांति है कहाँ वो बचपना कांति है चूड़ा पड़ा है झोले में सब बैठे कंबल खोले में पैकेट से बाहर झांक रहा है तिलकुट नहा धो के आ जाओ घर के घाट चित्रकुट दही जमी है हांडी में खाने की ना गारंटी है सब्जी काट रही है माँ पर नहाओगे कब ना डांट रही है माँ बच्चे थे तो सुबह सुबह बिना पूछे कर दिया जाता था पानी के हवाले मजाल है जो बिना डुबकी लगाये कुछ भी खा ले खिचड़ी की खुशबू जब आती थी रसोड़े से चूहे दौड़ने लगते थे सूरज के सातवें घोड़े से पापड़ घी कुरकरी चटनी चोखा अचार देख कर एक साथ कैसा हो विचार यूँ तो है ये बस एक दिन का त्यौहार पर इसके नाम में ही रात है दिन जैसा दिख रहा सब कह रहे सकरात है अगर ये पढ़ कर आपके मुँह में पानी है तो समझ जाओ की जिंदगी में अभी बाकी कहीं ना कहीं वो हसीं बचपन की कहानी है @shabdon_ke_ashish ✍️
क्या तुम्हारी तबीयत से वो अपनी तबीयत भी जोड़ देगा क्या ? जिस आदमी के लिए तू औरत बनी है लड़की से वो आदमी अपनी आदमियत छोड़ देगा क्या ? कभी पूछ अपने दिल से ज़रा ऐ दरिया जिस ओर मुड़ी है तू शौक से क्या उस ओर वो भी समंदर को मोड़ देगा क्या ? ये किस भ्रम में है तू सात जन्मों के क्या इस जन्म में ही वो रिश्ता तोड़ देगा क्या ? जिस ओर पलकें बिछाए बैठी है तू ओ स्त्री क्या वो भी अपनी नजर उस ओर देगा क्या ? जिस सम्मान का अभिमान पाल रखा है मन में तूने क्या तेरे मान की लाज वो थोड़ा और देगा क्या ? जिन लम्हों के दामन में जीना है तुझे क्या वो हसीं दौर देगा क्या ? जिस खामोशी से सबकुछ सहा है तुमने क्या वो दबा हुआ सा ही सही तनिक शोर देगा क्या ? जिन रिवाजों और तानों ने रुलाया है तुझे क्या वो उनका गला मरोड़ देगा क्या ? जिसके लिए तू आ गई है सब छोड़ के क्या तेरे लिए भी वो सबको छोड़ देगा क्या ? क्या तुम्हारी तबीयत से वो अपनी तबीयत भी जोड़ देगा क्या ? जिस आदमी के लिए तू औरत बनी है लड़की से वो आदमी अपनी आदमियत छोड़ देगा क्या ? - एक स्त्री ✍️ @shabdon_ke_ashish ✍️
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