हर रोज निकलता है 
मेरे सिरहाने से 
मिलने को 
तेरे ख्वाबों के 
सिलसिले से 
देखना एक दिन बन ही जाएगी यहाँ
अधूरी जिन्दगी कि पूरी दास्ताँ 
मेरे ख्यालों का कारवां !

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