पसंदीदा महक

गुजरे जो कभी आप मेरे अंजुमन से
पूछो ना आलम बेचैन तन्हा मन के
ख्वाबों में खुशबू ख्यालों के आरजू
होने लगी है फिर दिल में गुफ्तगू
यूँ आ के ना जाना मुझे करके दिवाना
कल तक तुम अजनबी और मैं अनजाना
लगता है पर सब अब जाना-पहचाना
रिश्ता हो जैसे ये सदियों पुराना
रूबरू जो हो बाहों के तो कहीं जाए ना बहक
साँसों के दरमियाँ है मेरी - "पसंदीदा महक" !!

✍️ shabdon_ke_ashish ✍️

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