विपक्षी एकता

आपसब ने बड़ा ही मशहूर एक दोहा जरूर सुना होगा 

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग।चन्दन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग।।

INDIA नाम उसी चंदन के वृक्ष के समान है जिसकी पवित्रता अब भी है और तब भी रहेगी मगर इस नाम रूपी पेड़ से जो नाना प्रकार के भुजंग लिपटे हुए है और एकता का ढोंग रचा रहे है ,ये सब कब ,कहाँ ,कैसे और कितना जहर उगलेंगें ;ये तो स्वयं इन्हें भी नहीं पता ,मगर इस परिघटना के लिए देश को तैयार रहना चाहिए । सबसे मजेदार बात तो ये है कि अगर इनसब में से कोई दल अपनी दावेदारी के अनुरूप परिणाम पेश ना कर सका या फिर खाता भी ना खोल सका ,राजनीति की भाषा में कहे कि अगर जमानत जब्त हो जाये फिर उसका नेता सर को झुकाये मगर फन उठाकर कुछ बोलने की कोशिश भी करे तो बाकी सब विषधर और नाग एक साथ बरस पड़ेंगें और कहेंगे :-

क्षमा शोभती उस भुजंग को
जिसके पास गरल हो
उसको क्या जो दंतहीन
विषरहित, विनीत, सरल हो।

फिर भी अगर लगता है कि विपक्ष एक है तो ऐसा लगने में कोई बुराई नहीं ।

🌱SwAsh🌳

✍️shabdon✍️ke✍️ashish✍️

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