हाय ये सफर ;उफ़्फ़ वो यादें ✍️☕✍️


रोज सुबह आपको इत्मिनान से पीने को चैन वाली चाय मिले ये जरूरी नहीं । वक़्त एवं हालात के हिसाब से उस दिलचस्प स्वाद के साथ हसीं यादों को दिए जाने वाले समय से समझौता करना पड़ता है , नहीं तो अगर फिर से उन लम्हों के दामन में खोये तो कहीं देर ना हो जाये ।

 आज तड़के सुबह मुझे पूरब वाली झरोखे से आते हवा के झोखे ने सूरज निकलने से पहले ही जगा दिया परंतु खुली आँखों के साथ जुबान को तड़का लगाने वाली उस स्वाद मेरा मतलब उस चाय की ऊर्जावान ख़ुराक के लिए समय पर्याप्त नहीं था , दिन भर का सफर जो शुरू होने वाला था । पहले पटना और फिर वहाँ से गया के लिए । फिर भी इस आनन-फानन में भी झटपट दो-चार घूँट तो लगा ही ली मैंने । यूँ तो मैं चाय का आदी नहीं हूँ पर मौसम का मिजाज और लेखक वाले अंदाज के लिए एक प्रबुद्ध अवसरवादी की तरह चुस्किया  लेता हूँ । आख़िर इस प्याली से मेरे ख़्वाब और ख़्याल जो जुड़े है पर मैं सुरमा भोपाली की तरह सिर्फ ख़्याली भी नहीं , मुझे काम भी करना होता है ,जी हाँ पढ़ने-लिखने के अलावा भी । 

      तैयार होते ही माँ दो आलू पराठे और दही लेकर आई और मैंने भी इन्हें निपटाने में देर कहाँ लगाई । भागते हुए एक भले मानुस से उनकी सवारी का आसरा लेकर मैं गाँव से शहर आया और फिर स्टेशन परिसर के भीतर से होते हुए आनंद नगर गया , समान उठाया और फिर भागते हुए ऑटो से वापस स्टेशन आया । गाड़ी भी आने ही वाली थी । थोड़ी ही देर में यात्रियों से भरी सवारी गाड़ी प्लेटफॉर्म पर पधारी । क्या नर और क्या नारी अफरा-तफरी में जनता सारी मानो मोदी जी वाला मुफ्त का राशन बट रहा हो । फिर भी किसी भी तरह एक सीट मुझे भी मिल गई खिड़की से दूर ही सही पर बैठ तो गए । 

      अब निकला ब्लूटूथ जो कनेक्ट हुआ मेरे फोन के साथ और लो सफर शुरू हो गया .....

     पूरब की तरफ रफ्तार से बढ़ते रेलगाड़ी के पहिये :- हाय ये सफर और उफ़्फ़ वो यादें .......... 

आपकी ख़ातिर मेरे दिल का जहाँ है हाज़िर
अपने सारे अरमां कर दूँ मैं ज़ाहिर 🤗💖🤗

🌱SwAsh🌳

@shabdon_ke_ashish ✍️





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