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तू मुझसे प्यार करती है मैं तुझसे प्यार करता हूँ

नामुमकिन को मुमकिन कर मैं एक इकरार करता हूँ तुम्हें पाने की हर कोशिश  मैं हर बार करता हूँ  जमाना क्या कभी समझेगा हमदोनों का ये रिश्ता  तू मुझसे प्यार करती है  मैं तुझसे प्यार करता हूँ  सड़क लम्बी हो या छोटी  सफर होता है सुहाना  जो तू साथ ना होती  तो लगता है वीराना  तू मेरी दीवानी है मैं तेरा दीवाना हूँ  जो तू मिल गई तो जिंदा हूँ वरना गुजरा जमाना हूँ  कोई किस्सा कभी बढ़ कर कोई दास्तान बन बैठा  किसी अजनबी से यूं मिलकर कोई अनजान बन बैठा  अभी तक टूटते देखे है हमने भी कई रिश्तें मगर हम जान बन बैठे यही पहचान बन बैठा  लड़खड़ाती मोहब्बत तो कहीं दम तोड़ देती है  मस्ती में कभी कश्ती किनारा छोड़ देती है  नई मंजिल नया रस्ता भी तो कल मोड़ देती है  मुसाफिर भी बदलते है अपने इरादों को  कभी हालात तो कभी हाल यूँ दम तोड़ देती है  कल तुम भी अकेली थी और हम भी अकेले थे  था नभ में चाँद फिर तन्हा सितारों के मेले थे  थोड़ा सा पास तुम आई थोड़ा सा पास मैं आया  अब बस हम ही हम लिपटे दूर सारे झमेले थे  जिसे दुनिया समझती हो वो बस एक छोटा समाज है  या यूँ समझो कि भड़की है कोई जंगल की आग है  हमारी जोड़ी सावन सी झमाझम बरसात है  कब ...

पसंदीदा महक

गुजरे जो कभी आप मेरे अंजुमन से पूछो ना आलम बेचैन तन्हा मन के ख्वाबों में खुशबू ख्यालों के आरजू होने लगी है फिर दिल में गुफ्तगू यूँ आ के ना जाना मुझे करके दिवाना कल तक तुम अजनबी और मैं अनजाना लगता है पर सब अब जाना-पहचाना रिश्ता हो जैसे ये सदियों पुराना रूबरू जो हो बाहों के तो कहीं जाए ना बहक साँसों के दरमियाँ है मेरी - "पसंदीदा महक" !! ✍️ shabdon_ke_ashish ✍️

हमारा गणतंत्र

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Teri_Maujudgi

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रोज सवेरे उस पहली किरण में जब मैं खोलूँ पलकें ढ़लती शाम के साथ जब हम खुद को तन्हा समझें चिलचिलाती धूप में जब बदन लगे जलने कंपकपाती ठंड में जब लगे रक्त भी जमने  भीगी-भीगी बारिशों में जब लगे कभी दिल मचलने भीनी-भीनी खुशबू लिए बाहों में सिमट कर साथ महकने दिन के उजाले में पग-पग पर कदम साथ रखने रातों को दरबदर तरबतर हर पहर रूबरू बहकने हर पल है बेखुदी सी !! इक तेरी मौजूदगी ही !!!!! ✍️ shabdon_ke_ashish ✍️

बनावटी दुनिया के मायावी लोग

व्यक्ति , परिवार ,  समाज , गाँव , मोहल्ला ,  कस्बा , शहर , नगर , राज्य , देश और अंत में दुनिया सब के सब बनावटी है । उतने ही कृत्रिम जितने कि कोई मिल गया का एलियन दोस्त जादू। सबको सब चाहिए पर पता नहीं कितना और कब चाहिए। त्यौहार से व्यवहार तक सब सजावटी बनावटी कागज के फूल की तरह है जो मौसम और मन के हिसाब से ही भाते है।  उदासी भी अब दिखावटी है खुशी भी बनावटी है।आँसू भी नकली है और मुस्कान की चमकान तो छलिया।  इतने सारे रूप लिए एक-एक चरित्र इस वसुंधरा पर विचरण कर रहा कि द्वापर और त्रेता युग के समस्त मायावी राक्षसों का कद भी इनके आगे ठिगना सा लगता है। वो तो कम से कम अपने स्वामी के प्रति वफादार और अपने जन्म के साथ न्याय करते थे। पर इन आदमखोर भेड़ियों का स्वरूप ना तो तर्कसंगत है और ना ही न्यायसंगत। कहने को तो सब मोह-माया है , फिर काहे का अपना पराया है। किस बात का परिवारवाद , जातिवाद , क्षेत्रवाद , सम्प्रदायवाद , भाई-भतीजावाद और इन सबके जड़ में ना जाने कितने विवाद जैसे तथाकथित लव-जिहाद। ये सब आपके पद , प्रतिष्ठा , पहुँच और सामर्थ्य के सामने नतमस्तक। प्रेम तो सब करते है पर प्रेम-विवाह अपराध है मगर अ...
हर रोज निकलता है  मेरे सिरहाने से  मिलने को  तेरे ख्वाबों के  सिलसिले से  देखना एक दिन बन ही जाएगी यहाँ अधूरी जिन्दगी कि पूरी दास्ताँ  मेरे ख्यालों का कारवां !

जायकेदार लफ्ज तेरे

जायकेदार लफ्ज तेरे ..... परोसते है चंद शेर मेरे  लजीज है  हर दिल अजीज है  महफिल वालों को क्या खबर किसने लिखा सब बेखबर  फिक्र किसे है कि दबे है लिखावटों के हुनर फक्र है तो बस लबों की बनावटों पर ! ✍️ shabdon_ke_ashish ✍️